क्यों मनाई जाती है धनतेरस? जानिए कथा और महत्व

न्यूज डेस्क: पूरे देश में आज धनतेरस मनाया जा रहा है। धनतेरस हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि लक्ष्मी माता और कुबेर देव की पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन समुद्र मंथन से भगवान विष्णु के अवतार धनवंतरी अमृत कलश और औषधीय लेकर प्रकट हुए थे इसीलिए यह दिन स्वस्थ दीर्घायु और समृद्धि का प्रतीक है।

धन्वंतरि जी के प्रकट होने के 2 दिन बाद समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसलिए दिवाली का त्योहार उस दिन मनाया जाता है।

धनतेरस की कथा

एक बार भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर आने का फैसला किया। तब देवी लक्ष्मी ने भी उनके साथ जाने की इच्छा जताई। विष्णु जी ने कहा, “तुम मेरे साथ चल सकती हो, लेकिन मेरी एक बात माननी होगी। मैं जब तक वापस न आऊं, तुम दक्षिण दिशा की ओर बिलकुल मत जाना।” लक्ष्मी जी ने हां कर दी और वे धरती पर आ गए। कुछ देर बाद, विष्णु जी ने लक्ष्मी जी को एक जगह रुकने को कहा और खुद दक्षिण दिशा की ओर चले गए।

लक्ष्मी जी को मिला था श्राप

भगवान के जाते ही लक्ष्मी जी के मन में यह जानने की इच्छा उत्पन्न हुई कि आखिर उस दिशा में ऐसा क्या है जहां जाने से उन्हें मना किया गया है? वह नहीं मानी और उनके पीछे-पीछे चल दीं। आगे जाकर उन्हें सरसों का एक खेत मिला, जिसमें सुंदर फूल खिले थे। लक्ष्मी जी को फूल बहुत अच्छे लगे, तो उन्होंने कुछ फूल तोड़कर अपना शृंगार कर लिया। थोड़ा और आगे चलने पर उन्हें गन्ने का खेत दिखा, जहां उन्होंने गन्ने तोड़कर उनका रस भी चूसा। उसी समय विष्णुजी आए और यह देख लक्ष्मीजी पर नाराज होकर उन्हें शाप दे दिया। मेरे मना करने पर भी तुम नहीं मानी और किसान की खेत में चोरी का अपराध कर बैठी। अब इस अपराध के जुर्म में इस किसान की 12 वर्ष तक सेवा करो। ऐसा कहकर भगवान उन्हें छोड़कर क्षीरसागर चले गए।

12 वर्ष किया किसान को सेवा

तब लक्ष्मीजी उस गरीब किसान के घर रहने लगीं। एक दिन लक्ष्मीजी ने उस किसान की पत्नी से कहा कि तुम स्नान कर पहले मेरी बनाई गई इस देवी लक्ष्मी का पूजन करो, फिर रसोई बनाना। तब तुम जो मांगोगी तुमको वह मिल जाएगा। किसान की पत्नी ने ऐसा ही किया। पूजा के प्रभाव और लक्ष्मीजी की कृपा से किसान का घर दूसरे ही दिन से अन्न,धन,रत्न,स्वर्ण आदि से भर गया। लक्ष्मी ने किसान को धन-धान्य से पूर्ण कर दिया। किसान के 12 वर्ष बड़े आनंद से कट गए, फिर 12 वर्ष के बाद लक्ष्मीजी जाने के लिए तैयार हुईं।

विष्णुजी लक्ष्मीजी को लेने आए। किसान ने उन्हें भेजने से इंकार कर दिया। तब भगवान ने किसान से कहा कि इन्हें कौन जाने देता है, यह तो चंचला हैं, कहीं नहीं ठहरतीं। इनको मेरा शाप था इसलिए 12 वर्ष से तुम्हारी सेवा कर रही थीं। किसान हठपूर्वक बोला कि नहीं अब मैं लक्ष्मीजी को नहीं जाने दूंगा। तब लक्ष्मीजी ने कहा कि हे किसान तुम मुझे रोकना चाहते हो तो जो मैं कहूं वैसा करो। कल त्रयोदशी यानी तेरस तिथि है। तुम कल घर को लीप-पोतकर स्वच्छ करना।

रात्रि में घी का दीपक जलाकर रखना और सायंकाल के समय मेरा पूजन करना और एक तांबे के कलश में रुपए भरकर मेरे लिए रखना। मैं उस कलश में निवास करूंगी। लेकिन पूजा के समय मैं तुम्हें दिखाई नहीं दूंगी। इस एक दिन की पूजा से वर्ष भर मैं तुम्हारे घर से नहीं जाऊंगी। यह कहकर वह दीपकों के प्रकाश के साथ दसों दिशाओं में फैल गईं। अगले दिन किसान ने लक्ष्मीजी के कथानुसार पूजन किया। उसका घर धन-धान्य से पूर्ण हो गया। इसी वजह से हर वर्ष तेरस के दिन लक्ष्मीजी की पूजा होने लगी।

धनतेरस के दिन क्या खरीदना चाहिए

धनतेरस के दिन सोना-चांदी, वाहन, बर्तन, वस्त्र या नई वस्तुएं खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कुछ नया खरीदकर घर लाने से मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर प्रसन्न होते हैं और घर में धन, वैभव और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। धनतेरस के दिन जरूरी नहीं की हर लोग सोने और चांदी ही खरीद सके। इसीलिए इस दिन सुपारी, बताशा ,झाड़ू, हल्दी ,साबुत धनिया यह सब खरीदना भी शुभ माना जाता है।

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