न्यूज डेस्क: देश में सोने की खरीदारी पर ब्रेक लगती नजर आ रही है। केंद्र सरकार द्वारा सोने पर आयात शुल्क में की गई बड़ी बढ़ोतरी का असर अब बाजार में साफ दिखाई देने लगा है। व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में सोने की मांग में तेज गिरावट दर्ज की गई है, जिससे ज्वेलरी कारोबार प्रभावित हुआ है।
इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद बदला बाजार का माहौल
सरकार ने हाल ही में सोने पर लगने वाले आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले के बाद सोने की कीमतों में बढ़ोतरी हुई, जिसका सीधा असर ग्राहकों की खरीदारी पर पड़ा। उद्योग जगत के अनुमान बताते हैं कि हाल के दिनों में सोने की मांग सामान्य स्तर से काफी नीचे चली गई है।
दो सप्ताह में मांग में बड़ी गिरावट
कारोबारी आंकड़ों के अनुसार, हालिया पखवाड़े में देशभर में सोने की खपत घटकर करीब 7.5 टन रह गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह लगभग 25 टन थी। यानी मांग में करीब 70 प्रतिशत तक की कमी देखने को मिली है।
छोटे कारोबारियों पर सबसे ज्यादा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति का सबसे अधिक प्रभाव असंगठित ज्वेलरी कारोबार पर पड़ा है। देश के कुल सोना व्यापार का बड़ा हिस्सा छोटे और पारंपरिक व्यापारियों के हाथ में है, जिनकी बिक्री में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जा रही है।
कई वजहों से कमजोर हुई खरीदारी
सोने की मांग कम होने के पीछे सिर्फ टैक्स बढ़ोतरी ही कारण नहीं है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंची कीमतों के अलावा धार्मिक कैलेंडर में अधिक मास का दौर भी खरीदारी को प्रभावित कर रहा है। इसके साथ ही लोगों में निवेश और खर्च को लेकर सतर्कता भी बढ़ी है।
सालाना खपत पर नजर
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है। देश में हर साल करीब 800 से 850 टन सोने की खपत होती है। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए कारोबारियों की नजर आने वाले महीनों पर टिकी हुई है कि मांग में सुधार आता है या गिरावट का दौर जारी रहता है।
आगे क्या?
ज्वेलरी उद्योग से जुड़े लोग मानते हैं कि यदि कीमतें और टैक्स का दबाव बना रहा तो सोने की बिक्री पर असर कुछ समय तक जारी रह सकता है। फिलहाल बाजार में ग्राहक खरीदारी को टालते हुए हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।






