पश्चिम एशिया में तनाव: ईरान से यूएई तक फंसे भारतीय, भारत सरकार की बढ़ी चिंता

न्यूज डेस्क : पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और हमलों के बीच बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक प्रभावित हो रहे हैं। ईरान में फंसे कई भारतीय सोशल मीडिया के जरिए मदद की गुहार लगा रहे हैं, जबकि उनके परिजन भारत सरकार से हस्तक्षेप की अपील कर रहे हैं। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि संयुक्त अरब अमीरात में भी ईरान की ओर से हुए हमलों ने दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई के नेतृत्व और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत कर हालात पर चिंता जताई है और शांति की अपील की है।

क्यों अहम है यह संकट भारत के लिए?

भारत के लिए यह स्थिति केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय और आर्थिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील है। पश्चिम एशिया के देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय मूल के लोग रहते हैं। अकेले ईरान में करीब 10 हजार और इजरायल में लगभग 40 हजार भारतीय बसे हुए हैं।

यूएई की कुल आबादी करीब 1.1 करोड़ है, जिसमें लगभग 30 प्रतिशत भारतीय मूल के लोग हैं। इनमें बड़ी संख्या श्रमिकों, कर्मचारियों और व्यापारियों की है। दुबई जैसे शहरों में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर वहां रह रहे भारतीयों और उनके परिवारों पर पड़ता है।

खाड़ी देशों में भारतीयों की बड़ी आबादी

यूएई और सऊदी अरब में भारतीयों की सबसे बड़ी संख्या निवास करती है। कुल भारतीय प्रवासी आबादी का लगभग आधा हिस्सा इन्हीं दो देशों में है। कतर में करीब 8 लाख भारतीय रहते हैं, जो वहां की कुल आबादी का लगभग 25 प्रतिशत है।

इसके अलावा ओमान, बहरीन, मिस्र और लेबनान जैसे देशों में भी लाखों भारतीय बसे हुए हैं। इन प्रवासियों द्वारा भारत भेजी जाने वाली धनराशि देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में इन क्षेत्रों में युद्ध या अस्थिरता का सीधा असर भारत की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।

शांति की अपील और कूटनीतिक प्रयास

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार संपर्क में है।

स्पष्ट है कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव भारत के लिए केवल एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की सुरक्षा और देश की आर्थिक स्थिरता से जुड़ा सवाल है। ऐसे में भारत की प्राथमिकता शांति, स्थिरता और अपने नागरिकों की हरसंभव मदद सुनिश्चित करना है।

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