न्यूज़ डेस्क : भारत ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई के निधन पर संवेदना व्यक्त की है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली में ईरान के राजदूत से मुलाकात की और कंडोलेंस रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। बताया जा रहा है कि खामनेई की मौत रविवार को तेहरान में अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए एयर स्ट्राइक के दौरान हुई थी।
भारत के रुख में हल्का बदलाव
खामनेई की मौत पर भारत की ओर से जताई गई संवेदना को उसके रुख में हल्के बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले भारत ने उन एयर स्ट्राइक की खुलकर निंदा नहीं की थी जिनमें खामनेई की मौत हुई थी। विपक्ष की ओर से इस मामले में औपचारिक बयान जारी करने की मांग भी उठी थी, लेकिन सरकार ने उस समय इस मुद्दे पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं दी थी।
मध्य पूर्व के हालात पर पीएम मोदी की चिंता
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा क्षेत्रीय विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने की वकालत करता रहा है। उनका मानना है कि तनाव को कम करने के लिए संवाद ही सबसे प्रभावी तरीका है।
जी7 देशों जैसा ही रहा भारत का रुख
इस मामले में भारत की प्रतिक्रिया काफी हद तक जी7 देशों के रुख से मिलती-जुलती रही। G 7 के किसी भी सदस्य देश ने खामनेई की मौत पर आधिकारिक शोक संदेश जारी नहीं किया था। वहीं विपक्ष लगातार यह मुद्दा उठा रहा है कि ईरान के साथ भारत के लंबे और ऐतिहासिक संबंध रहे हैं, इसलिए भारत को इस मामले में स्पष्ट प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
भारत-ईरान व्यापार में आई गिरावट
एक समय ऐसा था जब भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 13 प्रतिशत हिस्सा ईरान से आयात करता था और दोनों देशों के बीच व्यापार भी काफी मजबूत था। लेकिन जब Iran परमाणु समझौते से बाहर हुआ और उस पर अमेरिका की ओर से प्रतिबंध लगाए गए, तब भारत और ईरान के बीच व्यापारिक गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने लगी।






