पटना : बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाली जीविका से जुड़ी महिलाएं अब तकनीकी क्षेत्र में एक और बड़ा कदम रखने जा रही हैं। सोलर पैनल और एलईडी बल्ब निर्माण के बाद अब करीब सात हजार महिलाएं इंडक्शन चूल्हा बनाने की दिशा में काम करेंगी। इस पहल का उद्देश्य गांवों में रसोई गैस की समस्या का समाधान करना और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है
आईआईटी इंजीनियर देंगे विशेष प्रशिक्षण
इस परियोजना की जिम्मेदारी जीविका वुमेन इनिशिएटिव फॉर रिन्यूएबल एनर्जी एंड सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी गई है। खास बात यह है कि महिलाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए IIT मुंबई और IIT दिल्ली के विशेषज्ञ प्रशिक्षण देंगे। इसके लिए उन महिलाओं का चयन किया जा रहा है, जिनमें तकनीक सीखने और व्यवसाय करने की रुचि है।
कुशल तकनीशियन बनेंगी महिलाएं, बढ़ेगी आय
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये महिलाएं केवल कामगार नहीं रहेंगी, बल्कि प्रशिक्षित तकनीशियन के रूप में अपनी पहचान बनाएंगी। इससे उनकी आय में बढ़ोतरी होगी और वे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी तैयार कर सकेंगी।
गांवों में सस्ता और सुलभ विकल्प
ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडर की कमी अक्सर बड़ी समस्या बन जाती है। ऐसे में जीविका द्वारा तैयार किए जा रहे इंडक्शन चूल्हे किफायती विकल्प साबित होंगे। इसके साथ ही इनकी मरम्मत और सर्विसिंग की सुविधा भी गांवों में ही उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे लोगों को अतिरिक्त खर्च और परेशानी से राहत मिलेगी।
बिहार दिवस पर दिखी जबरदस्त मांग
बिहार दिवस के अवसर पर गांधी मैदान में लगाए गए स्टॉल पर इन चूल्हों को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। महज तीन दिनों में कई चूल्हों की बिक्री हुई और बड़ी संख्या में लोगों ने अग्रिम बुकिंग भी कराई। इससे साफ है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इस उत्पाद की मांग तेजी से बढ़ रही है।
भविष्य में बन सकता है लोकप्रिय विकल्प
आने वाले समय में यह पहल न केवल महिलाओं के सशक्तिकरण की मिसाल बनेगी, बल्कि सस्ते और टिकाऊ किचन समाधान के रूप में भी अपनी पहचान बना सकती है।







