न्यूज़ डेस्क : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सीजफायर के बावजूद भारत में तेल और गैस सप्लाई पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने समय रहते कई रणनीतिक कदम उठाए हैं, जिनका असर अब दिखने लगा है।
खाड़ी देशों पर निर्भरता घटाने की रणनीति
भारत ने सिर्फ खाड़ी देशों पर निर्भर रहने के बजाय अब गैस आयात के स्रोतों को बढ़ाया है। पहले जहां सीमित देशों से LPG मंगाई जाती थी, वहीं अब करीब 15 देशों से आयात किया जा रहा है। इससे सप्लाई चेन ज्यादा मजबूत हुई है और जोखिम कम हुआ है।
घरेलू उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी
सरकार के निर्देश के बाद देश में LPG का उत्पादन बढ़ाया गया है। पहले जहां बड़ी मात्रा में आयात पर निर्भरता थी, वहीं अब घरेलू उत्पादन में करीब 20% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे कुल उत्पादन बढ़कर लगभग 46,000 टन प्रतिदिन तक पहुंच गया है।
स्पॉट मार्केट से खरीदारी शुरू
सप्लाई में किसी तरह की कमी न हो, इसके लिए सरकारी तेल कंपनियों ने स्पॉट मार्केट का सहारा लिया है। इस कदम के तहत लगातार LPG कार्गो खरीदे जा रहे हैं, जो जून और जुलाई तक भारत पहुंचने की संभावना है। साथ ही, अमेरिकी कंपनियों के साथ समन्वय बढ़ाकर सप्लाई को सुचारु बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
रोजाना 80,000 टन LPG की जरूरत
भारत में हर दिन लगभग 80,000 टन LPG की खपत होती है। घरेलू उत्पादन बढ़ने के बावजूद बाकी जरूरत को पूरा करने के लिए आयात जरूरी है। लेकिन अब आयात के विविध स्रोतों के चलते सप्लाई बाधित होने का खतरा पहले से कम हो गया है।
आम लोगों और उद्योगों को राहत
सरकार के इन कदमों का सीधा असर यह हुआ है कि घरों और कमर्शियल सेक्टर में LPG की कमी नहीं होने दी जा रही। सप्लाई को संतुलित रखने की कोशिशों से फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं।
आगे भी सतर्क रहने की जरूरत
वैश्विक परिस्थितियां अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हैं, इसलिए सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जरूरत पड़ने पर और कदम उठाए जा सकते हैं, ताकि देश में गैस सप्लाई प्रभावित न हो।






