रेलवे में स्पोर्ट्स कोटा नौकरी का झांसा, 40 लाख की ठगी

धनबाद : धनबाद में रेलवे में स्पोर्ट्स कोटा के जरिए नौकरी दिलाने के नाम पर छह युवकों से 40.47 लाख रुपये ठगने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले के रहने वाले एस. बालाजी की शिकायत पर धनबाद थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

दो आरोपी गिरफ्तार, नकद और गाड़ियां जब्त

गिरफ्तार आरोपियों में ठाकुरकुल्ही निवासी संजीत कुमार और सरायढेला की तपोवन कॉलोनी के सुबोध कुमार शामिल हैं। इनके पास से 20 हजार रुपये नकद और दो कारें बरामद की गई हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से मोबाइल फोन, फर्जी ज्वाइनिंग लेटर, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट, स्पोर्ट्स कोटा प्रमाण पत्र, अभ्यर्थियों के आधार कार्ड और शैक्षणिक दस्तावेज, आईआरसीटीसी की मुहर तथा चेकबुक भी जब्त किए हैं।

संगठित गिरोह का खुलासा

सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह एक संगठित गिरोह है, जिसमें हर सदस्य की अलग भूमिका तय थी। सुबोध कुमार देशभर में युवाओं को नौकरी का लालच देता था, जबकि संजीत मेडिकल और दस्तावेजी प्रक्रिया संभालता था। दोनों मिलकर प्रति अभ्यर्थी 7 से 8 लाख रुपये तक वसूलते थे।

फर्जी मेडिकल और ट्रेनिंग का खेल

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह पहले एस. बालाजी का स्पोर्ट्स कोटा प्रमाण पत्र तैयार करवाया। इसके बाद धनबाद रेलवे अस्पताल में मेडिकल जांच कराकर रिपोर्ट दी गई। फिर फर्जी ज्वाइनिंग लेटर देकर अभ्यर्थियों को डोकरा हॉल्ट में तीन महीने तक ट्रेनिंग कराई गई। बाद में पुलिस वेरिफिकेशन के नाम पर उन्हें वापस भेज दिया गया।

कई महीनों तक नियुक्ति पत्र नहीं मिलने पर युवकों को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने मामला दर्ज कराया। सिटी एसपी ने डोकरा हॉल्ट में हुई ट्रेनिंग और रेलवे अस्पताल में मेडिकल जांच को भी जांच का विषय बताया है।

देशभर में फैला है नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, गिरोह के अन्य सदस्य देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय हैं और उनकी तलाश की जा रही है। दिसंबर 2024 में दिल्ली में बालाजी की मुलाकात मनीष नामक व्यक्ति से हुई थी। इसके बाद बालाजी के माध्यम से पालनी, प्रगलनादन, बुपालन सी, देवन आर समेत अन्य अभ्यर्थी धनबाद पहुंचे।

ट्रेनिंग की जिम्मेदारी अश्विनी उर्फ राजीव मिश्रा ने संभाली, जबकि सागर चक्रवर्ती के खाते में कुल 40.47 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। आरोप है कि अतिरिक्त पैसे नहीं देने पर युवकों को धमकियां भी दी गईं।

युवाओं को सतर्क रहने की जरूरत

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह कितने संगठित तरीके से काम करते हैं। पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि वे किसी भी भर्ती प्रक्रिया में आधिकारिक सूचना और वैध दस्तावेजों की पूरी जांच-पड़ताल अवश्य करें, ताकि ऐसे धोखाधड़ी से बचा जा सके।

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