न्यूज़ डेस्क : मां दुर्गा को समर्पित चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आज यानी 19 मार्च 2026, गुरुवार से आरंभ हो गया है। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है और यह हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में भक्त पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से देवी के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं।
नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा
नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की उपासना की जाती है। इन नौ स्वरूपों में मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं। श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से इनकी पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
प्रतिपदा तिथि और नवरात्रि का आरंभ
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष प्रतिपदा तिथि 19 मार्च की सुबह 6:53 बजे से शुरू होकर 20 मार्च की सुबह 4:53 बजे समाप्त हो रही है। चूंकि यह तिथि सूर्योदय के बाद प्रारंभ होकर अगले दिन सूर्योदय से पहले खत्म हो रही है, इसलिए इसे क्षय तिथि माना गया है। इसी कारण 19 मार्च से ही नवरात्रि का शुभारंभ माना गया है।
घटस्थापना के शुभ मुहूर्त
इस बार घटस्थापना (कलश स्थापना) के लिए दो विशेष शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। पहला मुहूर्त सुबह 6:53 बजे से 7:56 बजे तक का चौघड़िया मुहूर्त है। दूसरा अत्यंत शुभ समय अभिजीत मुहूर्त का है, जो दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। इसके साथ ही 12:26 बजे से 12:53 बजे तक लाभ चौघड़िया होने के कारण यह समय विशेष रूप से श्रेष्ठ माना गया है।
मां दुर्गा का आगमन इस बार डोली पर
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के आरंभ के दिन के आधार पर मां दुर्गा का वाहन निर्धारित होता है। इस वर्ष नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है, इसलिए माना जा रहा है कि मां दुर्गा डोली (पालकी) पर सवार होकर पृथ्वी पर आ रही हैं।
मां के वाहन का महत्व और संकेत
धार्मिक ग्रंथों में मां के वाहन का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि अगर मां हाथी पर आती हैं तो वर्षा अधिक होती है, घोड़े पर आने से अशांति या युद्ध के संकेत मिलते हैं, और नौका पर आगमन से समृद्धि और इच्छाओं की पूर्ति होती है। वहीं, डोली पर मां का आगमन शुभ संकेत नहीं माना जाता। इसे रोग, संकट और अस्थिरता का प्रतीक माना गया है।
आस्था और सावधानी का संदेश
हालांकि, इन मान्यताओं के बावजूद भक्तों के लिए यह समय श्रद्धा, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का होता है। मां दुर्गा की उपासना से जीवन में सुख, शांति और शक्ति का संचार होता है। इसलिए पूरे मन से पूजा करने और सकारात्मक विचार बनाए रखने का विशेष महत्व है।








