चैती छठ 2026: कौन है छठी मैया ? नहाय-खाय से लेकर पारण तक जानिए इस पवित्र पर्व के बारे में

न्यूज़ डेस्क : छठ महापर्व न केवल सूर्य देव की पूजा का अवसर है, बल्कि यह आस्था, शुद्धता और भक्ति का प्रतीक भी है। इसे बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। व्रत के दौरान शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है और श्रद्धालु अपने तन और मन को पवित्र रखते हुए पर्व मनाते हैं। दरअसल छठ पूजा साल में दो बार मनाया जाता है। एक कार्तिक माह में और दूसरा चैत्र माह में चैती छठ मनाया जता है।

छठी मैया कौन हैं?

छठ पर्व मुख्य रूप से सूर्य देव की पूजा पर आधारित है, लेकिन इसे छठी मैया के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि छठी माता योग माया का रूप हैं और वह संतान की सुरक्षा, पोषण और कल्याण की जिम्मेदारी निभाती हैं। देवी कात्यायनी के स्वरूप में उन्हें पूजा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार माता यशोदा ने अपने पुत्र श्रीकृष्ण की सुरक्षा और पालन के लिए इस देवी की पूजा की थी। इसी कारण से छठ पूजा में महिलाओं और माता-पिता द्वारा संतान की सुरक्षा और आशीर्वाद की कामना की जाती है।

नहाय-खाय से शुरू होता है यह पर्व

चैती छठ का पर्व 22 मार्च 2026, रविवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। यह पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु शुद्धता और साधना के साथ व्रत की शुरुआत करते हैं। नहाय-खाय के दिन महिलाएं स्नान के बाद भगवान सूर्य और अपने कुल देवता की पूजा करती हैं। इस दिन कद्दू भात का सेवन प्रसाद के रूप में किया जाता है और यह व्रत की प्रारंभिक तैयारी का प्रतीक होता है।

खरना: निर्जला व्रत की शुरुआत

चैती छठ का दूसरा दिन, खरना, 23 मार्च 2026, सोमवार को मनाया जा रहा है। इस दिन श्रद्धालु महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। शाम के समय वे गुड़ की खीर, रोटी और फल का भोग लगाकर इसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण करती हैं। यही से व्रत का कठिन चरण आरंभ होता है, जो अगली तिथि तक चलता है।

संध्या अर्घ्य: डूबते सूर्य को अर्घ्य

तीसरा दिन, संध्या अर्घ्य, 24 मार्च 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पवित्र जलाशयों और घाटों पर फल, ठेकुआ और पूजन सामग्री लेकर पहुंचते हैं। दिल्ली के समयानुसार सूर्यास्त का समय सायंकाल 06:34 बजे है। यह दिन सूर्य देव और छठी माता के प्रति श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने का अवसर होता है।

पारण और अंतिम अर्घ्य: पर्व का समापन

चौथा और अंतिम दिन 25 मार्च 2026, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु प्रात:काल उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करते हैं। सूर्योदय का समय दिल्ली में सुबह 06:20 बजे होगा। इस दिन माता और सूर्य देव से आशीर्वाद प्राप्त कर व्रत संपन्न होता है।

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