गैस की कमी से बदली व्यवस्था, कई जगहों पर बंद हुई रसोई और सीमित हुआ मेन्यू

दिल्ली : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत में भी देखने को मिल रहा है। रसोई गैस यानी एलपीजी की सप्लाई प्रभावित होने से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कई शहरों में गैस सिलेंडर की कमी की वजह से घरों के साथ-साथ होटल, रेस्टोरेंट और सार्वजनिक कैंटीन भी प्रभावित हो रही हैं। हालात ऐसे बन रहे हैं कि कई जगहों पर खाना बनाने की व्यवस्था तक प्रभावित हो गई है।

धार्मिक स्थलों पर भी पड़ा असर

एलपीजी की कमी का असर अब धार्मिक स्थलों तक पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर के पास स्थित अमावा मंदिर में चलने वाली ‘श्री राम रसोई’ को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और जरूरतमंदों को भोजन कराया जाता था, लेकिन गैस उपलब्ध नहीं होने के कारण फिलहाल यह सेवा रोक दी गई है।

होटल और रेस्टोरेंट में बदली व्यवस्था

देश के कई शहरों में होटल और रेस्टोरेंट भी इस संकट से जूझ रहे हैं। मुंबई के कई होटलों को अपनी कैंटीन बंद करनी पड़ी है या फिर मेन्यू को सीमित करना पड़ा है। वहीं चेन्नई और तमिलनाडु के कुछ इलाकों में कमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण कई होटल संचालकों ने अपने कर्मचारियों को अस्थायी छुट्टी दे दी है।

चेन्नई के होटलों में सीमित हुआ मेन्यू

चेन्नई के ईस्ट कोस्ट रोड पर स्थित एक होटल के मालिक के अनुसार गैस की कमी के चलते उन्हें अपने मेन्यू में कई बदलाव करने पड़े हैं। डोसे की कई वैरायटी को फिलहाल मेन्यू से हटा दिया गया है। अभी केवल इडली, सांभर और वड़ा जैसे सीमित व्यंजन ही बनाए जा रहे हैं, जबकि दोपहर और रात के खाने में मुख्य रूप से चावल से बने व्यंजन परोसे जा रहे हैं।

राजधानी के होटलों में भी दिख रहा असर

राजधानी के होटलों में भी गैस की कमी का असर साफ दिखाई देने लगा है। ईंधन की बचत के लिए कई होटल धीमी आंच पर पकने वाले व्यंजन जैसे कबाब और दाल मखनी को अस्थायी रूप से मेन्यू से हटा रहे हैं। साथ ही तंदूर का उपयोग भी सीमित कर दिया गया है। कई होटल अब केवल पीक ऑवर्स के दौरान ही तंदूरी व्यंजन परोस रहे हैं, क्योंकि इन्हें बनाने में ज्यादा समय और गैस की खपत होती है।

छोटा हुआ होटल का मेन्यू

गैस संकट के कारण कई होटलों ने अपने बड़े और विस्तृत मेन्यू को छोटा कर दिया है। पहले जहां मेन्यू 10 से 15 पन्नों का होता था, अब उसे घटाकर सिर्फ 2 से 3 पन्नों तक सीमित कर दिया गया है। इससे होटल संचालक गैस की खपत को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं।

इलेक्ट्रिक उपकरणों का बढ़ा इस्तेमाल

गैस की अनिश्चित सप्लाई से बचने के लिए बड़े होटलों ने अब इंडक्शन प्लेट, इलेक्ट्रिक फ्रायर और इलेक्ट्रिक ओवन जैसे उपकरणों का इस्तेमाल लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। हालांकि इससे बिजली का बिल बढ़ रहा है, लेकिन फिलहाल गैस संकट से निपटने के लिए यही एक विकल्प बचा है। कई होटलों में ग्राहकों के आकर्षण का केंद्र रहने वाले लाइव कुकिंग काउंटर भी अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं।

रेलवे कैटरिंग सेवा पर भी असर

एलपीजी की कमी का असर रेलवे की कैटरिंग सेवाओं पर भी पड़ सकता है। इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) ने स्टेशनों पर मौजूद कैटरिंग यूनिट्स को वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। उन्हें माइक्रोवेव, इंडक्शन कुकटॉप जैसे इलेक्ट्रिक उपकरणों का उपयोग करने और जरूरत पड़ने पर रेडी-टू-ईट भोजन का स्टॉक रखने के लिए कहा गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट की कैंटीन भी प्रभावित

दिल्ली हाईकोर्ट परिसर में वकीलों के लिए संचालित कैंटीन भी गैस की कमी से प्रभावित हुई है। एलपीजी खत्म होने के कारण वहां मेन कोर्स के कई व्यंजन बनाना बंद करना पड़ा है। फिलहाल कैंटीन में केवल हल्के खाद्य पदार्थ जैसे सैंडविच, सलाद और फ्रूट चाट ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

गैस पर निर्भरता कम करने की सलाह

स्थिति को देखते हुए कई होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशनों ने अपने सदस्यों को गैस पर निर्भरता कम करने की सलाह दी है। उन्हें इंडक्शन कुकटॉप, हॉट प्लेट और राइस कुकर जैसे इलेक्ट्रिक उपकरणों का अधिक उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। साथ ही लोगों से पैनिक बाइंग से बचने की अपील भी की गई है, क्योंकि इससे गैस संकट और गहरा सकता है।

आम जीवन पर बढ़ता असर

कुल मिलाकर एलपीजी की कमी का असर अब आम घरों से लेकर धार्मिक संस्थानों, अदालतों, होटलों और रेलवे कैटरिंग तक पहुंच चुका है। यदि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है और कई सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

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