अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा, पश्चिम एशिया में मंडराने लगा युद्ध का खतरा

न्यूज डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान और बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने पश्चिम एशिया में चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी सेना के कई बड़े सैन्य विमान, जिनमें C-17A ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भी शामिल हैं, मध्य एशिया से यूरोप की दिशा में लगातार उड़ान भर रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि क्षेत्र में किसी बड़ी सैन्य तैयारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

ईरान ने दी कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी

ईरान की ओर से भी अमेरिका को साफ संदेश दिया गया है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब मजबूती से दिया जाएगा। ईरानी संसद के अध्यक्ष मुहम्मद बाक़िर क़ालिबाफ़ ने कहा कि अगर अमेरिका कोई आक्रामक कदम उठाता है तो ईरान उसका “निर्णायक जवाब” देगा। ईरानी नेतृत्व लगातार यह संकेत दे रहा है कि वह दबाव की राजनीति स्वीकार करने वाला नहीं है और जरूरत पड़ने पर हर स्तर पर जवाब देने के लिए तैयार है।

पाकिस्तान कर रहा बीच-बचाव की कोशिश

बढ़ते तनाव के बीच Pakistan भी स्थिति को शांत करने की कोशिशों में जुटा हुआ है। खबरों के मुताबिक पाकिस्तान के गृह मंत्री तेहरान पहुंचे हैं, जहां उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ अहम बैठकें की हैं। माना जा रहा है कि पाकिस्तान दोनों देशों के बीच संवाद कायम रखने और टकराव को कम करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि फिलहाल किसी ठोस समझौते या बातचीत में प्रगति के संकेत सामने नहीं आए हैं।

पेंटागन ने तैयार किए कई सैन्य विकल्प

रिपोर्ट्स के अनुसार Pentagon ने संभावित हालात को देखते हुए कई सैन्य योजनाएं तैयार कर ली हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर दोबारा सैन्य अभियान शुरू किया जा सकता है। इस बार केवल सैन्य ठिकानों ही नहीं, बल्कि ईरान के संभावित यूरेनियम भंडार और परमाणु ढांचे को भी निशाना बनाए जाने की चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि पिछले संघर्ष के दौरान कुछ संवेदनशील परमाणु सामग्री भूमिगत स्थानों पर सुरक्षित बची रह गई थी।

ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी चिंता

इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से लौटते समय ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर दोनों देशों के बीच समझौता नहीं हुआ तो हालात “तबाही” तक पहुंच सकते हैं। ट्रंप ने यह भी माना कि मौजूदा युद्धविराम बेहद कमजोर स्थिति में है और कभी भी हालात बिगड़ सकते हैं। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ गई है।

पूरी दुनिया की नजरें पश्चिम एशिया पर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक राजनीति को फिर से अस्थिर कर दिया है। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी देशों की नजरें आने वाले दिनों में दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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