न्यूज़ डेस्क : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब और खतरनाक रूप लेता जा रहा है। हाल ही में ईरान ने प्रिंस सुल्तान एयर बेस को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। इस हमले में कम से कम 10 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। हमले के दौरान बेस पर मौजूद सैन्य संसाधनों को भी नुकसान पहुंचा, जिसमें एक अमेरिकी रीफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट शामिल है।
अबूधाबी तक पहुंचा हमले का असर, भारतीय भी हुए घायल
इस हमले का असर सिर्फ सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहा। अबूधाबी में एक मिसाइल को इंटरसेप्ट करने के दौरान उसका मलबा गिर गया, जिससे 5 भारतीय नागरिक घायल हो गए। घायलों को मामूली से मध्यम चोटें आई हैं। मलबे के गिरने से खलीफा इकोनॉमिक जोन में दो स्थानों पर आग भी लग गई, जिसे काबू करने के प्रयास किए गए। यह घटना दिखाती है कि मिसाइल रोकने के बावजूद खतरा पूरी तरह टलता नहीं है।
लगातार हमलों से बढ़ा खतरा
यह एयरबेस पर हुआ दूसरा बड़ा हमला है। इससे पहले भी इसी तरह की कार्रवाई में कई रीफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। बार-बार हो रहे हमलों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि ईरान सीधे अमेरिकी सैन्य ठिकानों को टारगेट कर रहा है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ गई है।
भारी नुकसान और बढ़ते सैन्य जोखिम
इस पूरे संघर्ष में अब तक 300 से अधिक अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं, हालांकि कई सैनिक इलाज के बाद ड्यूटी पर लौट आए हैं। वहीं, अरबों डॉलर के सैन्य उपकरण नष्ट या क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि महज तीन हफ्तों में अमेरिका को 1.4 से 2.9 बिलियन डॉलर तक का नुकसान हुआ है, जो इस टकराव की गंभीरता को दर्शाता है।
युद्ध के दौरान अन्य घटनाएं भी चिंताजनक
तनाव के बीच कुछ अन्य घटनाएं भी सामने आई हैं। कुवैत में एयर डिफेंस सिस्टम की गलती से तीन अमेरिकी F-15E लड़ाकू विमान गिरा दिए गए, हालांकि उनके पायलट सुरक्षित बच निकले। वहीं इराक में दो KC-135 एयरक्राफ्ट की टक्कर में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई। इसके अलावा MQ-9 रीपर ड्रोन और THAAD मिसाइल सिस्टम के रडार भी हमलों में नष्ट हुए हैं।
अमेरिका की जवाबी तैयारी तेज
स्थिति को देखते हुए अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करने में जुट गया है। USS George H.W. Bush को मिडिल ईस्ट के पास तैनात करने की तैयारी चल रही है। यह स्पष्ट नहीं है कि यह मौजूदा तैनाती को बदलेगा या अतिरिक्त ताकत के रूप में शामिल होगा, लेकिन इससे अमेरिका की रणनीतिक सक्रियता साफ झलकती है।
परमाणु ठिकाने पर हमले से बढ़ी चिंता
इसी बीच ईरान के बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट पर भी हाल ही में हमला किया गया, हालांकि इसमें कोई बड़ा नुकसान या हताहत नहीं हुआ। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने इस घटना पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
क्या और बढ़ेगा यह टकराव?
लगातार हो रहे हमले, सैन्य तैयारियां और बढ़ता तनाव इस बात का संकेत दे रहे हैं कि स्थिति अभी और बिगड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया, तो यह संघर्ष बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।






