न्यूज डेस्क: बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है। जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे बिहार का माहौल भी राजनीतिक बनता जा रहा है।
पक्ष विपक्ष दोनों के तेवर दिनोदिन तेज होते जा रहे हैं। हालांकि चुनाव की तिथि निश्चित नहीं हुई है, पर अनुमानतः अक्टूबर नवम्बर में चुनाव हो सकते हैं।
कई पार्टियां चुनावी मैदान में
बिहार में अगले 5 साल के लिए कौन करेगा राज, किसकी होगी जीत, जिसे लेकर बिहार में हर राजनीतिक पार्टी अपने अपने स्तर से काम कर रही है। इस चुनाव में हम राजनीतिक पार्टी के बात करे तो जदयू-भाजपा-हम-लोजपा(R) गठबंधन की सरकार है और राजद के नेतृत्व वाला महागठबंधन विपक्ष में है जहां कांग्रेस, VIP के साथ वामपंथी पार्टियां मैदान में हैं।
जनसुराज पार्टी की दावेदारी

इनके अलावे इस बार के चुनावी मैदान में एक नई पार्टी जनसुराज उभर कर आई है, जो जाने माने रणनीतिकार प्रशांत किशोर के नेतृत्व में इस चुनाव में अपना दम भर रही है। वहीं सीमांचल के क्षेत्रों में हैदराबादी बिरयानी का छौंका यानी कि AIMIM भी दावेदारी ठोक रहे हैं
बात करे तो बिहार में विधानसभा सीट 243 है। इसलिए किसी भी पार्टी की सरकार बनाने के लिए 123 सीट पर जीत होनी चाहिए।
वोट अधिकार यात्रा

इन दिनों की बात करे तो बिहार की महागठबंधन पार्टी राजद और कांग्रेस ने वोट अधिकार यात्रा रैली शुरू की। यह यात्रा 17 अगस्त से बिहार के सासाराम से शुरू हुई। यह यात्रा 15 दिवसीय है जो 1 सितंबर को खत्म होगा। इस यात्रा के अहम किरदार
राहुल गांधी है, जिनके नेतृत्व में यह यात्रा मतदाता सूची में हेराफेरी , वोट चोरी को लेकर शुरू की है।
20 जिलों में होगी यात्रा
यह पदयात्रा 20 से अधिक जिलों में, 1300 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करेगा। जिसकी प्लानिंग बहुत पहले ही हो चुकी थी। हालांकि इस यात्रा को हम राहुल गांधी के भारत जोड़ो आंदोलन से जोड़ कर देख सकते है। जहां राहुल गांधी ने कई नेताओं के साथ मिलकर लगभग 4000 किलोमीटर पदयात्रा की दूरी तय की थी।
महागठबंधन पर मोदी का हमला

वही दूसरी ओर पीएम मोदी ने महागठबंधन पर हमला बोला , उससे यह साफ हो गया कि एनडीए और खासकर बीजेपी अब पूरी तरह से एक्टिव मोड में आ चुकी है। गयाजी के कार्यक्रम में पीएम मोदी ने 13 हजार करोड़ से ज्यादा की लागत से रेल, सड़क, बिजली, आवास, जलापूर्ति और स्वास्थ्य क्षेत्रों से जुड़ी विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। वही बेगूसराय में छह लेन सिमरिया पुल का उद्घाटन किया।
ऐसे में पक्ष विपक्ष पार्टी एक दूसरे पर हमलावर रहते ही है, राजनीतिक उठा पटक लगा रहता है। विधानसभा चुनाव को लेकर हर पार्टी अपने अपने स्तर से पुरजोर मेहनत कर रही। बिहार में किसकी होगी सत्ता की जीत, कौन पहनेगा ताज यह तो अब आने वाले चुनाव में पता चलेगा।
जहाँ यह देखना भी दिलचस्प होगा कि नई नवेली जनसुराज, लालू के बागी पुत्र तेजप्रताप और ओवैसी की पार्टी AIMIM क्या कुछ गुल खिला पाती है







