साल का आखिरी चंद्रग्रहण, भारत में दिखाई देगा ब्लड मून का आकर्षित नजारा

न्यूज डेस्क: 7 सितंबर को दूसरा और साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। जो भारत में साफ दिखाई देगा। चंद्र ग्रहण लगने का समय 9:25 से शुरू होगा जो 8 सितंबर रात्रि 1:26 तक रहेगा। करीब 3.30 घंटे का इसका प्रभाव रहेगा। ये पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। जिसे ब्लड मून भी कहा जाता है । खास बात यह कि 7 सितंबर को पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण भी लग रहा और इसके साथ ही पितृपक्ष की शुरुआत हो जाएगी।

चंद्रग्रहण क्या है

खगोलविज्ञान के अनुसार जब पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के बीच में आती है तो चंद्र ग्रहण होता है। जब सूर्य व चंद्रमा के बीच में पृथ्वी इस प्रकार से आ जाए जिससे चंद्रमा का पूरा या आंशिक भाग ढंक जाए और सूर्य की किरणें चंद्रमा तक ना पहुंचे। ऐसी स्थिति में चंद्र ग्रहण होता है।

चंद्रग्रहण से जुड़ी कथा

ऐसे में चंद्र ग्रहण से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं भी है जहां जिसमें से एक कथा राहु केतु के बारे में बताया गया है। ऐसी मान्यताएं है कि समुद्र मंथन के दौरान जब देवों और दानवों के साथ अमृत पान के लिए विवाद हुआ तो इसको सुलझाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया।

भगवान विष्णु ने देवताओं और असुरों को अलग-अलग बिठाया। लेकिन असुर छल से देवताओं की लाइन में आकर बैठ गए और अमृत पान कर लिया। देवों की लाइन में बैठे चंद्रमा और सूर्य ने राहु को ऐसा करते हुए देख लिया।

इस बात की जानकारी उन्होंने भगवान विष्णु को दी, जिसके बाद भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन राहु ने अमृत पान किया हुआ था, जिसके कारण उसकी मृत्यु नहीं हुई और उसके सिर वाला भाग राहु और धड़ वाला भाग केतु के नाम से जाना गया। इसी कारण राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा को अपना शत्रु मानते हैं और पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को ग्रस लेते हैं। इसलिए चंद्र ग्रहण होता है। स्कंद पुराण के अवंति खंड के अनुसार राहु और केतु की जन्म भूमि है। सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण का दंश देने वाले ये दोनों छाया ग्रह उज्जैन में ही जन्मे थे।

चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन ही होता है। चंद्र ग्रहण के दिन देवी-देवताओं के दर्शन करना अशुभ माना जाता है। इस दिन मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और किसी भी तरह की पूजा का विधान नहीं किया जाता है।

ब्लूड मुन क्या होता है

जब पूर्ण ग्रहण होता है तो चंद्रमा लाल हो जाता है जिसे ही ब्लड मून यानि लाल चांद कहा जाता है। यह एक बेहद अद्भुत खगोलीय नजारा है जो पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान दिखाई देता है। जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तो सूर्य की सीधी रोशनी चांद तक नहीं पहुंच पाती है। इस स्थिति में चांद पर पूरी तरह अंधेरा न होकर वह गहरे लाल या तांबे जैसे रंग में बदल जाता है। यह नजारा बहुत ही अद्भुत और आकर्षित होती है।

Related Posts

दिल्ली में धमाका : आतंकी साजिश या फिर हादसा ? जांच में जुटी पुलिस

दिल्ली: राजधानी दिल्ली में कार ब्लास्ट ने देश को दहला के रख दिया। बता दे कि दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के समीप सोमवार की शाम एक खड़ी गाड़ी…

बिहार ने रचा इतिहास, मेट्रो सेवा देने वाला बना 12वां राज्य

न्यूज डेस्क: विधानसभा चुनाव के ऐलान से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना मेट्रो का उद्घाटन कर दिया है। बिहार देश के उन 12 राज्यों में शामिल हो जाएगा, जहां…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

आधार कार्ड में ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी, समय रहते करा लें सुधार

आधार कार्ड में ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी, समय रहते करा लें सुधार

महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स को कहें अलविदा, हल्दी आइस क्यूब्स से निखारें चेहरा

महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स को कहें अलविदा, हल्दी आइस क्यूब्स से निखारें चेहरा

सोने पर बढ़े टैक्स का असर, खरीदारी में 70% तक गिरावट

सोने पर बढ़े टैक्स का असर, खरीदारी में 70% तक गिरावट

गया में ड्रग विभाग की बड़ी कार्रवाई, पूर्व सांसद के आवास पर छापेमारी

गया में ड्रग विभाग की बड़ी कार्रवाई, पूर्व सांसद के आवास पर छापेमारी

शाम की भूख के लिए परफेक्ट है सूजी वेजिटेबल चीला

शाम की भूख के लिए परफेक्ट है सूजी वेजिटेबल चीला

यूपी चुनाव से पहले ‘CJP’ की एंट्री से बढ़ी सियासी हलचल, अखिलेश यादव ने दिया खुला समर्थन

यूपी चुनाव से पहले ‘CJP’ की एंट्री से बढ़ी सियासी हलचल, अखिलेश यादव ने दिया खुला समर्थन