न्यूज़ डेस्क: नरेंद्र मोदी बुधवार से इजरायल के दो दिवसीय दौरे पर हैं, जिसे भारत–इजरायल संबंधों में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। रक्षा, व्यापार और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने के मकसद से यह यात्रा खास मानी जा रही है। अक्टूबर 2023 में गाजा संघर्ष के बाद इजरायल के कई पारंपरिक साझेदारों के साथ रिश्तों में तनाव देखा गया था, ऐसे समय में भारत का समर्थन इजरायल के लिए कूटनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ पर जोर
Benjamin Netanyahu ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना मित्र बताते हुए कहा कि दोनों देश इनोवेशन और सुरक्षा के मजबूत भागीदार हैं। वहीं मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और इजरायल की रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। दोनों नेताओं की गर्मजोशी ने यह संकेत दिया कि आपसी सहयोग आने वाले समय में और बढ़ेगा।
मोदी जैकेट’ बनी चर्चा का विषय
डिनर के दौरान एक दिलचस्प दृश्य देखने को मिला, जब नेतन्याहू ने ‘मोदी जैकेट’ पहनकर सबको चौंका दिया। इस खास अंदाज की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं और दोनों देशों की दोस्ती का प्रतीक बन गईं।
भारत का ‘सुदर्शन चक्र’ एयर डिफेंस प्लान
भारत अब अपनी वायु रक्षा प्रणाली को पूरी तरह आधुनिक बना रहा है। पहले जहां सुरक्षा सिर्फ चुनिंदा ठिकानों तक सीमित थी, अब लक्ष्य पूरे देश के आसमान को बहु-स्तरीय सुरक्षा कवच से ढकना है। इस नई रणनीति को अनौपचारिक रूप से ‘सुदर्शन चक्र’ की संकल्पना से जोड़ा जा रहा है, जिसमें अलग-अलग रेंज की कई लेयर शामिल हैं।
सबसे बाहरी परत: S-400 और प्रोजेक्ट कुशा

सबसे बाहरी सुरक्षा घेरे में रूस से खरीदी गई S-400 Triumf मिसाइल प्रणाली तैनात की जा रही है। 2018 के समझौते के तहत तीन रेजिमेंट भारत को मिल चुकी हैं, जबकि शेष दो 2026 तक शामिल हो जाएंगी। इसके साथ ही भारत स्वदेशी लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली ‘प्रोजेक्ट कुशा’ पर भी काम कर रहा है, जो भविष्य में इस परत को और मजबूत करेगी।
मीडियम लेयर: आयरन बीम और बाराक-8

मध्यम दूरी की सुरक्षा के लिए इजरायल द्वारा विकसित Iron Beam प्रणाली को गेम-चेंजर माना जा रहा है। यह हाई-पावर लेजर तकनीक से 10 किमी के दायरे में ड्रोन, रॉकेट, मोर्टार और एंटी-टैंक मिसाइलों को कुछ ही सेकंड में नष्ट कर सकती है।
इसकी खासियतें हैं
- प्रति शॉट बेहद कम लागत (करीब 3–5 डॉलर)
- प्रकाश की गति से हमला
- बिजली आधारित होने के कारण लगभग असीमित फायरिंग क्षमता
- सटीक निशाना और कम सहायक नुकसान
- ड्रोन स्वार्म के खिलाफ प्रभावी
हालांकि भारी बारिश, धुंध या धूल में लेजर की प्रभावशीलता घट सकती है, इसलिए इसे Iron Dome के पूरक के रूप में देखा जा रहा है। इसी परत में भारत और इजरायल की संयुक्त परियोजना Barak 8 (MR-SAM) भी शामिल है, जो दुश्मन के विमान और मिसाइलों को मध्यम दूरी पर ही मार गिराने में सक्षम है।
शॉर्ट रेंज सुरक्षा: आकाश-एनजी और QRSAM
सीमा क्षेत्रों और संवेदनशील ठिकानों की सुरक्षा के लिए Akash-NG और QRSAM जैसे शॉर्ट-रेंज सिस्टम तैनात किए जा रहे हैं। ये तेजी से प्रतिक्रिया देकर कम दूरी के खतरों को निष्क्रिय करते हैं।
नजदीकी सुरक्षा: कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलें
सबसे अंदरूनी परत में कंधे पर रखकर चलाई जाने वाली पोर्टेबल मिसाइलें तैनात हैं, जो कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन और हेलीकॉप्टर जैसे खतरों को तुरंत निशाना बनाती हैं।
बहु-स्तरीय सुरक्षा की नई रणनीति
इस तरह भारत की नई एयर डिफेंस नीति बहु-स्तरीय सुरक्षा ढांचे पर आधारित है, जिसमें लंबी दूरी से लेकर बेहद नजदीकी खतरों तक हर स्तर पर अलग-अलग तकनीक काम करेगी। भारत और इजरायल के बीच बढ़ता सहयोग इस सुरक्षा ढांचे को और मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।






