न्यूज डेस्क: दशहरा का पर्व हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के अगले दिन यानी दशमी तिथि पर मनाया जाता है। शारदीय नवरात्रि के अगले दिन दशहरा मनाया जाता है । इसे विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन भगवान श्री राम की पूजा की जाती है और रावण के पुतले का दहन किया जाता है। दशहरा असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया और दूसरी तरफ माता दुर्गा ने महिषासुर का वध किया और लोगों को उसके भय और अत्याचार से मुक्त कराया था।
दशहरा से जुड़ी कई मान्यताएं है। आइए जानते है आखिर क्यों मनाया जाता है दशहरा का पर्व क्या है पौराणिक कथाएं।
राम ने किया था रावण का वध

पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा उल्लेख मिलता है कि इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था । भगवान राम जब 4 वर्षों का वनवास काट रहे थे । उसी दौरान रावण ने छल से माता सीता का हरण किया था । इसके बाद राम और लक्ष्मण जी ने मिलकर सीता माता की खोज में निकले थे।
इसी दौरान उनकी मुलाकात हनुमान जी से हुई थी। हनुमान जी ने माता सीता का पता लगाया था । उसके बाद भगवान राम और रावण के बीच भयंकर युद्ध हुआ था। रावण पर विजय पाने के लिए भगवान राम ने नौ दिनों तक मां दुर्गा की उपासना की और दसवें दिन रावण का वध किया था। उसके बाद से नवरात्रि की दशमी तिथि को दशहरा का पर मनाया जाने लगा।
मां दुर्गा ने किया महिषासुर का वध

एक अन्य कथा के अनुसार ऐसा माना जाता है की मां दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया था ।दोनों के बीच पूरे 9 दिनों तक भयंकर युद्ध हुआ था और दसवें दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का अंत कर दिया। माता दुर्गा ने संसार को महिषासुर के भय और अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। यही कारण है की दशमी तिथि को विजयदशमी के रूप में भी मानते हैं।
