न्यूज डेस्क: बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बिहार की राजनीतिक इतनी दिलचस्प होती है कि पूरे देश की निगाहे बिहार चुनाव पर टिकी होती है।
त्रिकोणीय होगा चुनाव
बिहार में दो बड़ी पार्टी लालू प्रसाद और नीतीश कुमार की पार्टी को माना जाता है । हमेशा से लोग इन दोनों पार्टी की सत्ता ही देखते हुए आ रहे हैं। लेकिन इस बार चुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने एंट्री लिया है। जिससे बिहार के राजनीतिक सर गर्मी तेज हो गई है। इस बार चुनाव दो पार्टी नहीं बल्कि चुनाव तत्रिकोणीय होगा। इस बार का चुनाव काफी दिलचस्प होगा की त्रिकोणीय चुनाव में बिहार की सत्ता किसके हाथ में होगा।
पहला चरण 6 नवंबर को
निर्वाचन आयोग के आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बिहार विधानसभा चुनाव की तारीख की घोषणा की। बता दें कुल 243 सीटों पर होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के इस महायुद्ध को सिर्फ दो चरणों में संपर्क करने का फैसला लिया गया है । जो राज्य के इतिहास में पहली बार होगा । पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को होगा । जबकि दूसरे चरण के लिए 11 नवंबर को वोटिंग होगी । पहले चरण में 6 नवंबर को 121 सीटों पर मतदान होंगे। वहीं दूसरे चरण 11 नवंबर को 122 सीटों पर वोटिंग होगी। 14 नवंबर को वोटो की गिनती की जाएगी और उसे दिन तय हो जाएगा कि बिहार में अगली सरकार किसकी बनेगी।
दो चरणों में होगी वोटिंग
पहले चरण के लिए नामांकन 10 अक्तूबर से शुरू हो जाएगा। जबकि 17 अक्तूबर को नामांकन फाइल करने की आखिरी तारीख है। पहले चरण में 121 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। बता दें कि दूसरे चरण में 122 सीटों पर मतदान होगा। नामांकन प्रक्रिया 13 अक्टूबर को शुरू हो जाएगी। जबकि नामांकन फाइल करने की आखिरी तारीख 20 अक्टूबर है।
62 सीटों पर एनडीए का कब्जा
बिहार विधानसभा के पहले चरण में जिन 121 सीटों पर मतदान होना है, उनमें से 62 सीटों पर एनडीए का कब्जा है। जबकि 59 सीटें महागठबंधन के खाते में हैं। पहले चरण की 121 सीटों में एनडीए के पास सबसे अधिक 38 सीटें भाजपा के पास हैं। जदयू के पास इन सीटों में से 24 सीटें हैं।
महागठबंधन के पास इन 121 सीटों में 59 सीटें हैं। इनमें से राजद 41 सीटों पर काबिज है। कांग्रेस के 8, भाकपा (माले) की 7, सीपीआई और सीपीएम की दो-दो सीटें शामिल हैं।
