झारखण्ड : बच्चा चोरी की अफवाह से गांवों में दहशत, आंगनबाड़ी केंद्र खाली

घाटशिला : पश्चिम बंगाल की सीमा से शुरू हुई बच्चा चोरी की अफवाह अब घाटशिला अनुमंडल के गांवों में भी फैल चुकी है। इस अफवाह ने ग्रामीण इलाकों में डर का माहौल बना दिया है। अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर इतने चिंतित हैं कि वे उन्हें घर से बाहर भेजने में भी हिचकिचा रहे हैं।

आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की घटती उपस्थिति

अफवाह का सबसे ज्यादा असर आंगनबाड़ी केंद्रों पर देखने को मिल रहा है। बड़ाकुर्शी आंगनबाड़ी केंद्र में सुबह करीब 11 बजे तक एक भी बच्चा मौजूद नहीं था, जबकि यहां 24 बच्चों का नामांकन है। केंद्र की सहायिका ने बताया कि अफवाह फैलने के बाद से बच्चे आना बंद हो गए हैं।
सुंदरपुर आंगनबाड़ी केंद्र भी निर्धारित समय तक बंद मिला। केंद्र की सेविका ने बताया कि अभिभावक डरे हुए हैं और बच्चों को भेजने से साफ मना कर रहे हैं। हेंदलजुड़ी के राजाबासा केंद्र में भी यही स्थिति है। वहां की सेविका ने बताया कि वे गांव-गांव जाकर लोगों को समझा रही हैं, लेकिन भय के कारण कोई भी बच्चा भेजने को तैयार नहीं है।

आदिम जनजाति क्षेत्रों में और गहरा डर

हलुदबनी क्षेत्र में स्थिति और गंभीर है। यहां आदिम जनजाति सबर समुदाय के लोग डर के कारण बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं। हाल ही में गांव में एक संदिग्ध व्यक्ति को देखे जाने की खबर के बाद ग्रामीणों ने घेराबंदी कर दी थी। रात में आसमान में ड्रोन उड़ते देख लोगों का डर और बढ़ गया है।

घरों में कैद हो रहे बच्चे

ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने बच्चों को खेलने तक नहीं जाने दे रहे हैं। बच्चों को अकेले बाहर निकलने की इजाजत नहीं है। गांवों में भय का माहौल साफ दिखाई दे रहा है। अफवाहों के चलते माता-पिता मानसिक तनाव में हैं और हर अनजान व्यक्ति पर शक किया जा रहा है।

बाहरी लोगों और व्यापारियों पर भी असर

डर का असर सिर्फ बच्चों और अभिभावकों तक सीमित नहीं है। गांवों में कपड़े, खिलौने और पुराने सामान खरीदने-बेचने वाले लोग भी आने से बच रहे हैं। सर्वे करने वाली टीमें भी गांवों में जाने से हिचक रही हैं। अनजान चेहरों को देखकर ग्रामीण घेराबंदी कर रहे हैं। कई गांवों में रात के समय पहरा दिया जा रहा है। यहां तक कि अगर किसी के घर मेहमान आ जाएं, तो भी लोगों को परेशानी और शक का सामना करना पड़ रहा है।

इस तरह, एक अफवाह ने पूरे इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है, जिसका सबसे ज्यादा असर बच्चों की दिनचर्या और शिक्षा पर पड़ रहा है।

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