दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु ।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ||
न्यूज डेस्क: शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। दाहिने हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमंडल लिए, मां ब्रह्मचारिणी का यह रूप उनके संयम और साधना का प्रतीक है।
संयम और तप की देवी
ब्रह्मचारिणी का अर्थ है संयम, अनुशासन और तप की देवी। इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य और सदाचार जैसे गुणों का विकास होता है। मान्यता है कि इस दिन उनकी कथा का पाठ करने से साधक को त्याग, वैराग्य, संयम और सभी सुखों की प्राप्ति होती है।
माता ने अपनाया ब्रह्मचर्य रूप
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार जब माता पार्वती भगवान शिव को अपना वर बनाने के लिए तपस्या पर बैठी थी। तो उन्होंने सब कुछ त्याग करके ब्रह्मचर्य अपना लिया था। मां के इसी रूप को ब्रह्मचारिणी के नाम से जाना जाता है। दुर्गा मां की इस रूप की पूजा अविवाहित देवी के रूप में किया जाता है। इनके एक तरफ कमंडल होता है और दूसरी तरफ जप माला होती है। मां को सरलता, शांति और सौम्य रूप में पूजा जाता है।
माता ब्रह्मचारिणी की कथा
मां ब्रह्मचारिणी की कथा तप और संकल्प की अद्भुत मिसाल है। हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म माता ने जन्म लिया। नारदजी की प्रेरणा से भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए माता ने हजारों वर्षों तक कठोर तप किया। इसी कारण उनका नाम तपश्चरिणी, यानी ब्रह्मचारिणी पड़ा।

एक हजार साल तक उन्होंने फल-फूल खा कर अपना तप किया। अगले तीन हजार वर्षों तक टूटे बिल्व पत्र पर जीवित रहीं। अंत में निर्जल-निराहार रहकर उन्होंने कई हजार वर्षों तक साधना की जिसे देखकर देवता और ऋषि भी चकित रह गए। खुले आकाश के नीचे धूप, वर्षा और कठिन उपवास सहते हुए उन्होंने संयम और धैर्य की पराकाष्ठा दिखाई। जिससे उन्हें अपर्णा नाम भी मिला। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवताओं ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि उनकी मनोकामना पूर्ण होगी और शिव उन्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से साधक को आत्मबल और सफलता दोनों मिलते हैं।
पूजा की विधि
इस दिन पूजा के समय आपको हरे रंग का वस्त्र धारण करना चाहिए। पूजा के समय पीले या सफेद रंग के कपड़े का इस्तेमाल करें। मां का अभिषेक पंचामृत से करें और रोली, अक्षत, चंदन, जैसी चीजों का भोग लगाएं। मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए आप उन्हें चीनी और पंचामृत का भी भोग लगा सकते हैं। मां को गुड़हल और कमल का फूल पसंद है।
