News desk: “स्वर्ग से सुंदर मिथिला धाम ” यह एक लोकप्रिय उक्ति है जो मिथिला क्षेत्र की प्रशंसा में कही जाती है। ऐसे तो हर कोई मिथिला क्षेत्र से वाकिफ है, लेकिन जब से मिथिला क्षेत्र में मिथिला हाट बना है, तब से काफी लोगों में इसकी चर्चा है।
जैसे देश दुनिया में दिल्ली हाट मशहूर है उसी तरह अब मिथिला हाट भी मशहूर हो रहा है। बिहार सरकार द्वारा मधुबनी के झंझारपुर में मिथिला हाट का निर्माण किया गया। यह एक पर्यटन स्थल है जहां हर दिन दूर दूर से लाखों लोग घूमने आते है।

मिथिला हाट को बने लगभग 2 साल हो गए हैं और इन 2 सालों में देश के हर कोने कोने में मिथिला हाट अपनी एक पहचान बन चुका है। यहां मिथिला कला और संस्कृति की झलक दिखती है।
जैसे-जैसे देश आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है वैसे-वैसे बहुत चीज विलुप्त होती नजर आ रही है। ऐसे में बिहार के मिथिला क्षेत्र में मिथिला हाट बनना इस बात का भी प्रतीक है कि लोग मिथिला की कला ,संस्कृति और यहां के खान पान को जान सके।
पारंपरिक मिथिला रेस्टोरेंट

मिथिला हाट में यूं तो काफी रेस्टोरेंट है लेकिन यहां भंसा घर काफी लोगों के बीच लोकप्रिय है । इस रेस्टोरेंट का नाम पारंपरिक मिथिला रसोई के नाम पर रखा गया है।

जो मिट्टी के चूल्हा और लकड़ी के चूल्हा के इस्तेमाल के लिए जानी जाती है। यहां खाना भी उसी तरह पकाया जाता है और पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक रेसिपी का इस्तेमाल किया जाता है।

इस भंसा घर में आप मिथिला के पारंपरिक खाना का स्वाद चख सकते हैं। इस भंसा घर को पारंपरिक मिथिला शैली में बनाई गई है, जिसकी छत फूंस और दीवारें मिट्टी की है। रेस्टोरेंट के अंदर पारंपरिक मिथिला कला और कलाकृतियों को बनाया गया है।
50 से अधिक आधुनिक दुकान

हम यह कह सकते हैं कि मिथिला हाथ को इस तरीके से बनाया गया है जहां लोग एक ही कैंपस के अंदर अपने परिवार के साथ अच्छा समय बिता सकते हैं। कैंपस के अंदर सारी सुविधाएं उपलब्ध है । मिथिला हाट में 50 आधुनिक दुकानें बनाई गई है। इसके अलावा फूड कोर्ट, ओपन एयर थिएटर, प्रशासनिक भवन, मल्टी परपस हॉल, डोरमेट्री, झरना, पार्किंग एरिया को काफी खूबसूरत बनाया गया है। मनोरंजन के लिए बोटिंग है, बच्चों के लिए झूले हैं बहुत सारे रेस्टोरेंट हैं।
लोगों को मिले रोजगार

मिथिला हाट बनने से कई लोगों को रोजगार के अवसर भी मिले। मधुबनी पेंटिंग से जुड़े कलाकारों को एक गेटवे मिला। छोटे से जगह पर इस तरह के हाथ खोलने से कलाकारों को बाजार मिला जहां उनकी कला लोगों के बीच काफी प्रसिद्ध हो रही है।







