रांची : हावड़ा से अहमदाबाद जा रही 12834 सुपरफास्ट एक्सप्रेस एक संभावित बड़े हादसे से बाल-बाल बच गई, जब रात के समय ट्रेन के सामने अचानक हाथियों का झुंड आ गया। यह घटना देर रात करीब 1:42 बजे कलाईकुंडा और सरडीहा के बीच उस रेलखंड पर हुई, जो खड़गपुर मंडल के तहत आता है और ‘एलीफेंट जोन’ के रूप में जाना जाता है।
लोको पायलट की सूझबूझ से बची जान
जैसे ही लोको पायलट की नजर ट्रैक पर मौजूद हाथियों पर पड़ी, उन्होंने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया। ट्रेन और हाथियों के बीच दूरी बेहद कम, करीब 10 मीटर रह गई थी। लोको पायलट ए. खालको और सहायक लोको पायलट एस.एन. सोरेन की सतर्कता से न सिर्फ हाथियों की जान बची, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो गई।
यात्रियों में मची हलचल
अचानक ट्रेन रुकने और सामने हाथियों का झुंड देखने से यात्रियों में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया। हालांकि, स्थिति जल्द ही नियंत्रण में आ गई और किसी तरह की अनहोनी नहीं हुई।
एलीफेंट जोन में बढ़ती चुनौती
यह इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ है, जहां अक्सर हाथी रेलवे ट्रैक पार करते नजर आते हैं। दृश्यता कम होने के कारण लोको पायलटों को इस रूट पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। धीमी गति और लगातार हॉर्न का इस्तेमाल यहां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
क्यों खतरनाक हैं ऐसे हालात
रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौजूदगी न केवल वन्यजीवों के लिए खतरा है, बल्कि ट्रेन हादसों की आशंका भी बढ़ा देती है। तेज रफ्तार ट्रेन के टकराने से डिब्बे पटरी से उतर सकते हैं, जिससे यात्रियों की जान को जोखिम होता है और रेलवे संपत्ति को भी नुकसान पहुंचता है।
समाधान की दिशा में कदम
ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे ने हाथियों के सुरक्षित आवागमन हेतु विशेष कॉरिडोर, अंडरपास और ओवरब्रिज बनाने की योजना बनाई है। चक्रधरपुर मंडल समेत कई क्षेत्रों में इस दिशा में काम शुरू किया जा चुका है, जहां कुल 17 संरचनाओं के निर्माण के लिए टेंडर जारी किए गए हैं।
इंसान और वन्यजीव के बीच संतुलन जरूरी
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि विकास के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सतर्कता और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए ही इंसान और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखा जा सकता है।







