दिल्ली: टेक दुनिया की दिग्गज कंपनी Oracle ने हाल ही में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी शुरू की है, जिसका सबसे ज्यादा असर भारत में देखने को मिल रहा है। कंपनी के भारत में लगभग 30,000 कर्मचारी थे, जिनमें से शुरुआती चरण में ही करीब एक-तिहाई से अधिक लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। वैश्विक स्तर पर भी यह संख्या 30,000 से ऊपर पहुंच चुकी है, और संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले हफ्तों में यह प्रक्रिया और तेज हो सकती है।
“री-स्ट्रक्चरिंग” के नाम पर बदलाव
कंपनी ने इस कदम को संगठनात्मक पुनर्गठन (restructuring) का हिस्सा बताया है। कर्मचारियों को भेजे गए संदेश में कहा गया कि कई भूमिकाएं अब कंपनी की नई रणनीति के तहत जरूरी नहीं रह गई हैं। हालांकि, इस पर कंपनी की ओर से सार्वजनिक रूप से ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है।
AI और ऑटोमेशन की ओर बड़ा झुकाव
दिलचस्प बात यह है कि यह छंटनी ऐसे समय में हो रही है जब Oracle का कारोबार मजबूत स्थिति में है। कंपनी अब तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ा रही है। हाल ही में OpenAI के साथ अरबों डॉलर की बड़ी साझेदारी भी इसी दिशा का संकेत देती है।
इस बदलाव का साफ मतलब है कि कंपनी अब मानव संसाधन की बजाय टेक्नोलॉजी और ऑटोमेशन पर ज्यादा निर्भर होना चाहती है।
सेवेरेंस पैकेज पर शर्तें
कंपनी ने निकाले गए कर्मचारियों के लिए एक सेवेरेंस पैकेज भी घोषित किया है, लेकिन इसमें एक महत्वपूर्ण शर्त जुड़ी हुई है। यह लाभ केवल उन कर्मचारियों को मिलेगा जो स्वेच्छा से इस्तीफा देंगे।
पैकेज में शामिल हैं:
- हर साल की सेवा के बदले 15 दिनों का वेतन
- एक महीने का बकाया वेतन
- नोटिस पीरियड की सैलरी
- लीव एनकैशमेंट और ग्रेच्युटी
- अतिरिक्त 2 महीने का वेतन (टॉप-अप)
अगर कोई कर्मचारी कंपनी के फैसले को चुनौती देता है, तो वह इन लाभों से वंचित हो सकता है।
भारत बनाम अमेरिका: अलग-अलग नियम, अलग असर
कंपनी के एक कर्मचारी, Merugu Sridhar की टिप्पणी के बाद यह मुद्दा और चर्चा में आ गया है। उनका कहना है कि अमेरिका में श्रम कानून काफी सख्त हैं, जिससे वहां बड़े पैमाने पर छंटनी करना आसान नहीं है।
इसका नतीजा यह निकल रहा है कि भारत और भारतीय मूल के कर्मचारियों पर इसका असर ज्यादा पड़ रहा है।
क्या संकेत मिलते हैं?
यह पूरा घटनाक्रम टेक इंडस्ट्री में बदलते ट्रेंड को दर्शाता है—जहां कंपनियां अब तेजी से AI, ऑटोमेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश कर रही हैं, और पारंपरिक भूमिकाएं धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बदलाव रोजगार के स्वरूप को किस तरह प्रभावित करता है—खासकर भारत जैसे बड़े टेक टैलेंट हब में।






