पूरे देश में गणेश जन्मोत्सव की धूम, जानें गणेश चतुर्थी से जुड़ी कहानी

न्यूज डेस्क: भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है क्योंकि भारत में विभिन्न प्रकार की संस्कृतियों और परंपराएं हैं। उन्हीं त्योहारों में से एक है गणेश चतुर्थी।

गणेश चतुर्थी को लेकर पूरे देश में धूम है। इसे गणेश जन्मोत्सव के नाम से भी जाना जाता है । कहा जाता है कि इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। गणेश चतुर्थी भाद्रपद माह की शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर 10 दिनों तक चलता है। वैसे तो गणेश पूजा राज्यों के कई हिस्सों में मनाए जाते हैं लेकिन यह महाराष्ट्र में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है।

समृद्धि और सौभाग्य के देवता

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य का देवता माना जाता है। हमारे हिंदू धर्म में ऐसा माना जाता है कि कोई भी शुभ काम करने से पहले हम गणेश जी की पूजा करते हैं। उनका स्मरण करते हैं। जिससे सारे कार्य शुभ होते हैं। गणेश उत्सव 27 अगस्त से लेकर 6 सितंबर तक चलेगा । 10 दिनों तक चलने वाला यह त्योहार बहुत धूमधाम और भक्ति भाव से की जाती है।

कैसे हुआ भगवान गणेश का जन्म

पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा कहा गया है कि भगवान गणेश माता पार्वती के शरीर के मेल से उत्पन्न हुआ है। माता पार्वती स्नान करने से पूर्व अपनी मैल से एक मूर्ति बनाया और उसमें प्राण दे दिया। जिससे गणेश जी का जन्म हुआ। माता पार्वती ने उसे अपना द्वार पाल बना दिया। उसी समय भगवान शिव लौटे और जब गणेश जी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया तो क्रोधित होकर शिवजी ने गणेश का सिर काट दिया। इससे माता पार्वती बहुत ही दुखी हुई।तब पार्वती जी के दुःख को देखकर शिवजी ने गणेश जी को पुनः जीवित करने का वचन दिया और हाथी का शीश लगाकर गणेश जी को जीवन दान दिया।

भगवान गणेश का प्रिय है मोदक

गणेश भगवान को मोदक बहुत ही प्रिया है। गणेश भगवान को हमेशा मोदक के लड्डू का ही भोग लगाया जाता है। गणेश चतुर्थी का मौका हो और मोदक का जिक्र ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता। बिना मोदक के गणेश जी को भोग नहीं लगाया जाता। ऐसा कहा जाता है कि गणेश भगवान को पूरे 21 मोदक के भोग लगाए जाते हैं।

दस दिनों तक मनाया जाता है पूजा

गणेश चतुर्थी पर लोग अपने घर में गणपति जी की मूर्ति की स्थापना करते हैं और 10 दिनों तक पूजा पाठ करते हैं और फिर दसवें दिन गणेश जी का विसर्जन करते हैं। हम बात करें तो गणेश चतुर्थी महाराष्ट्र में बहुत ही बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। गणेश जी की विशाल मूर्तियों का स्थापना किया जाता है और पूरे श्रद्धा भाव से पूरे 10 दिन गणेश जी की पूजा की जाती है और लोग हर्षौल्लास के साथ यह पर्व मानते हैं।

सामाजिक महत्व क्या है

गणेश चतुर्थी का उत्सव प्राचीन काल से मनाया जा रहा है। मराठा राजा शिवाजी ने इसे राज्य स्तर पर महत्व दिया। बड़ी धूम धाम के साथ लोगों के बीच गणेश पूजा का आयोजन करवाते थे। आगे चलकर लोकमान्य तिलक ने भी बड़े स्तर पर आयोजन का रूप दिया। उन्होंने इसे समाज के अलग-अलग वर्गों को एकजुट करने का माध्यम बनाया। इस तरह गणेश चतुर्थी धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता का प्रतीक भी बन गई।

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